Ganpati Bhajan

गणपति भजन

1

गाइए गणपति जगवंदन
शंकर सुवन भवानी के नंदन।।

सिद्धी सदन गजवदन विनायक।

कृपा सिंधु सुंदर सब लायक।।

गाइए गणपति जगवंदन

मोदक प्रिय मृद मंगल दाता।

विद्या बारिधि बुद्धि विधाता।।

गाइए गणपति जगवंदन

मांगत तुलसीदास कर जोरे।

बसहिं रामसिय मानस मोरे।।

गाइए गणपति जगवंदन

2

सुख करता दुखहर्ता, वार्ता विघ्नाची

नूर्वी पूर्वी प्रेम कृपा जयाची
सर्वांगी सुन्दर उटी शेंदु राची
कंठी झलके माल मुकताफळांची

जय देव जय देव, जय मंगल मूर्ति
दर्शनमात्रे मनःकामना पूर्ति
जय देव जय देव

रत्नखचित फरा तुझ गौरीकुमरा
चंदनाची उटी कुमकुम केशरा
हीरे जडित मुकुट शोभतो बरा
रुन्झुनती नूपुरे चरनी घागरिया

जय देव जय देव, जय मंगल मूर्ति
दर्शनमात्रे मनःकामना पूर्ति
जय देव जय देव

लम्बोदर पीताम्बर फनिवर वंदना
सरल सोंड वक्रतुंडा त्रिनयना
दास रामाचा वाट पाहे सदना
संकटी पावावे निर्वाणी रक्षावे सुरवर वंदना

जय देव जय देव, जय मंगल मूर्ति
दर्शनमात्रे मनःकामना पूर्ति
जय देव जय देव

शेंदुर लाल चढायो गजमुख को
दोन्दिलाल बिराजे सूत गौरिहर को
हाथ लिए गुड लड्डू साई सुरवर को
महिमा कहे ना जाय लागत हूँ पद को

जय जय जय जय जय
जय जय जी गणराज विद्यासुखदाता
धन्य तुम्हारो दर्शन मेरा मत रमता
जय देव जय देव

अष्ट सिधि दासी संकट को बैरी
विघन विनाशन मंगल मूरत अधिकारी
कोटि सूरज प्रकाश ऐसे छबी तेरी
गंडस्थल मद्मस्तक झूल शशि बहरी

जय जय जय जय जय
जय जय जी गणराज विद्यासुखदाता
धन्य तेरो दर्शन मेरा मत रमता
जय देव जय देव

जय जय जी गणराज विद्यासुखदाता
धन्य तेरो दर्शन मेरा मन रमता
जय देव जय दे

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