आओ छठ करें...

#लेख २१/११/२०२०
बालपन से ही मां के साथ छठ का अंश बनते बनते आज छठ ही मेरे जीवन का अंश बन गया है। कुछ जिज्ञासु मित्रों के प्रश्नों के उत्तर के रूप में आज मैं छठ के प्रति मेरे कुछ अनुभव को आप सभी से साझा कर रही हूं।
 
छठ किसी वर्ग , वर्ण या क्षेत्र विशेष तक सीमित नहीं है। छठी मां प्रत्येक हृदय का पोषण कर रही हैं आवश्यकता है अनुभूति की।
 
छठ महापर्व का महात्म्य अक्षय है। वसुधा पर जीवन के कारक सूर्य की उपासना युगों से अनवरत चली आ रही है। त्रेता में श्री राम श्री सीता जी के अयोध्या आगमन के उपरांत नकारात्मक ऊर्जा के क्षय के उद्देश्य से छठ पूजा की गई। द्वापर में कर्ण , कुंती , द्रौपदी व पांडवों द्वारा भी छठ पूजा कर सूर्य उपासना के वृतांत वेदों में तथा विशेषकर सूर्य अराधना ऋगवेद में वर्णित है। वैज्ञानिक दृष्टकोण भी छठ अर्घ्य की बेला को स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी बताता है।पंचतत्वों से बनी मानव काया जब पंचतत्वों ( नदी का जल,पृथ्वी,गगन, दीपक की अग्नि, वायु) के साथ आध्यात्मिकता के चरमोत्कर्ष पर होती है,तो वह ध्यान जीवन को सकारात्मकता , मन को शांति, व तन को बल, आरोग्य प्रदान करता है।
 
मेरा अनुभव है कि छठ महापर्व हमें प्रकृति से जुड़कर स्वयं की प्रकृति से भिज्ञ होने का अवसर प्रदान करता है। सूर्य, वनस्पतियों,जल ,वायु आदि के रूप में स्पष्ट रूप से दृष्टिगोचर व प्रतीत होने वाले जीवनदाता,पोषक,पालक,ईश्वर को धन्यवाद करने को प्रेरित कर उनके अवर्णनीय महत्व को विस्मृत ना करने की परंपरा प्रदान करने वाला यह व्रत सामाजिक समरसता में भी वृद्धि करता है।
महा व्रत के नियम हमें अनुशासन, स्वच्छता,प्रेम,धैर्य ,करुणा, सहयोग,एकता का सुंदर एवम् विशिष्ट पाठ पढ़ाते हैं। हमें समाज में प्रत्येक वर्ग के परस्पर अखण्ड संबंध के महत्व को बताते हैं। सबके साथ सहयोग से जीवन यापन की प्रेरणा देते हैं। परिवार में पुत्र- पुत्री, पति पत्नी दोनों ही की विशिष्टता का संदेश देते हैं।पारिवारिक संबंधों को भी सूदृढ़ करते हैं।
 
मैंने देखा है कि जिन क्षेत्रों में छठ की परंपरा समृद्ध है,वहां महीनों पहले से इसकी तैयारी प्रारंभ हो जाती है। सूप, दौरा, दियली,कोशी, दीपक,आलता,सिंदूर, गुड़ , फल अन्य वनस्पतियों की मांग बाजार को अति सक्रिय कर देती है,जिससे ग्रामीण कुटीर उद्योगों को बढ़ावा मिलता है,रोजगार की उत्पत्ति होती है।
छठ मात्र पर्व या व्रत तक नहीं सीमित है। छठ एक तपस्या है, स्वयं ही एक धर्म है । छठ असीमित संभावनाओं से परिपूर्ण कालखंड है। इसलिए तो छठ मां है।
 
तो आएं जीवन को संभावनाएं दें जीवन को सकारात्मकता दें, जीवन को अनुशासन दें जीवन को परम आनंद दें, जीवन को जीवन दें।
#आओ #छठ करें…
लेखिका
ऋचा राय